खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्रालय के 5 एमओयू साइन
नई दिल्ली। जनजातीय कार्य मंत्रालय, ट्राइफेड, आईसीएआर, एनएसएफडीसी, नेफेड और एनसीडीसी के साथ खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्रालय के 5 एमओयू साइन किये गए हैं।
खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्रालय ने जनजातीय मामले मंत्रालय, जनजातीय सहकारी विपणन विकास महासंघ लिमिटेड (ट्राइफेड), भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर), राष्ट्रीय अनुसूचित जाति वित्त एवं विकास निगम (एनएसएफडीसी), राष्ट्रीय कृषि सहकारी विपणन महासंघ लिमिटेड (नेफेड) और राष्ट्रीय सहकारी विकास निगम (एनसीडीसी) के साथ पांच समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए। खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्रालय ने जनजातीय कार्य मंत्रालय के साथ एक संयुक्त पत्र भी हस्ताक्षर किया। इसके अलावा, खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्रालय ने प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य प्रसंस्करण उद्यम औपचारिकरण (पीएमएफएमई) योजना के लिए नोडल बैंक के रूप में यूनियन बैंक ऑफ इंडिया के साथ एक समझौते पर भी हस्ताक्षर किए।
एमओयू साइन करने के मौके पर खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर, सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्री थावरचंद गहलोत, जनजातीय कार्य मंत्री अर्जुन मुंडा व खाद्य प्रसंस्करण उद्योग राज्य मंत्री रामेश्वर तेली उपस्थित थे।
इस अवसर पर श्री तोमर ने कहा कि इन एमओयू के माध्यम से सरकार की प्राथमिकता वाले क्षेत्रों में रोजगार उपलब्ध कराने, जीवन स्तर में बदलाव लाने व सरकार की योजनाओं के माध्यम से हितग्राहियों का जीवन संवारने में मदद मिलेगी। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की प्राथमिकताएं तो बहुत है, लेकिन सर्वप्रमुख है- सबका साथ, सबका विकास। छोटे उद्यमी सरकार के सहकार के बिना आगे नहीं बढ़ सकते, इसलिए जरूरी है कि उन्हें सरकार का साथ मिले।
श्री गहलोत ने कहा कि इस स्कीम में 800 करोड़ रू. की उपलब्धता अनुसूचित जाति के लोगों के लिए है, जिससे उन्हें काफी लाभ मिलेगा और वे स्वावलंबी एवं आत्मनिर्भर बनने की दिशा में आगे बढ़ेंगे। श्री मुंडा ने कहा कि इन एमओयू से आत्मनिर्भर भारत की दृष्टि से पूरे देश को सबल बनाने का महत्वपूर्ण अवसर है। इनके माध्यम से लिंक बनने से विभिन्न क्षेत्रों में लोगों को लाभ पहुंचेगा। श्री तेली ने कहा कि पांच एमओयू नए अवसर और संभावनाएं लाएंगे। इससे टीम भावना और बढ़ेगी।
ट्राइफेड के साथ एमओयू, स्कीम से जुड़े आदिवासियों व अन्य उद्यमों द्वारा बनाए फूड प्रोडक्ट्स के लिए ब्रांड ‘ट्रायफूड’ के तहत ब्रांडिंग की सुविधा प्रदान करेगा। फूड प्रोडक्ट्स के लिए ब्रांडिंग,मार्केटिंगअच्छी पैकेजिंग आदि का विकास भी हो सकेगा।
आईसीएआर के साथ एमओयू से विभिन्न संस्थानों, विशेषकर फसल-विशिष्ट संस्थानों में विकसित खाद्य प्रसंस्करण प्रौद्योगिकियों, पैकेजिंग व मशीनरी के विवरण साझा करने की सुविधा होगी, जो सूक्ष्म उद्यमों/एफपीओ/एसएचजी/सहकारिता के लिए उपयुक्त है ताकि प्रक्रियाओं/उत्पादों को प्राथमिकता के रूप में सुदृढ़ किया जा सके। आईसीएआर के संस्थान पीएमएफएमई योजना के अंतर्गत क्षमता निर्माण प्रयास का समर्थन करने के लिए डीपीआर, पठन सामग्री, श्रव्य-दृश्य प्रशिक्षण सामग्री और विशिष्ट उत्पादों/प्रक्रियाओं से संबंधित फिल्में तैयार करने में मदद करेंगे।
नैफेड के साथ एमओयू से एफपीओ/एसएचजी/को-ऑपरेटिव समूहों द्वारा बनाए कृषि खाद्य उत्पादों के विपणन व विकास से ‘नेफेड फूड’उत्पाद के लिए एक नए ब्रांड के विकास में आसानी होगी।
एनसीडीसी के साथ एमओयू, राज्यों में फूड प्रोसेसिंग में जुटी सहकारी समितियों और इनके सदस्यों को परियोजनाओं की तैयारी और उनकी विस्तृत प्रोजेक्ट रिपोर्ट में सहायक होगा।
एक नोडल बैंक के रूप में यूनियन बैंक ऑफ इंडिया केंद्र और राज्य सरकार से प्राप्त सब्सिडी राशि को ऋण बैंक खाते में हस्तांतरित करने में सुविधा प्रदान करेगा।
कार्यक्रम में खाद्य प्रसंस्करण उद्योग की सचिव श्रीमती पुष्पा सुब्रह्मण्यम, जनजातीय कार्य मंत्रालय के सचिव दीपक खांडेकर, खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्रालय के अतिरिक्त सचिव मनोज जोशी, आईसीएआर के महानिदेशक, एनएसएफडीसी के मुख्य प्रबंध निदेशक एस. के. नारायण, एनसीडीसी के कार्यकारी निदेशक एस.के.टी. चन्नेशप्पा, यूनियन बैंक ऑफ इंडिया महाप्रबंधक विनोद कुमार पटनायक व ट्राइफेड के उप महाप्रबंधक अमित भटनागर उपस्थित थे।
पीएमएफएमई योजना- आत्मनिर्भर भारत अभियान में प्रारंभ पीएमएफएमई केंद्र प्रायोजित योजना है, जिसका उद्देश्य खाद्य प्रसंस्करण उद्योग के असंगठित क्षेत्र में प्रतिस्पर्धात्मकता को प्रोत्सहित करना व क्षेत्र के औपचारिकता को बढ़ाना तथा एफपीओ, स्वयं सहायता समूहों और उत्पादक सहकारी समितियों को उनकी संपूर्ण मूल्य श्रृंखला के साथ सहायता प्रदान करना है। वर्ष 2020-21 से 2024-25 तक 10,000 करोड़ रू. के खर्च के साथ, इस योजना में मौजूदा सूक्ष्म खाद्य प्रसंस्करण उद्यमों के उन्नयन के लिए वित्तीय, तकनीकी और व्यावसायिक सहायता प्रदान करने के लिए 2,00,000 सूक्ष्म खाद्य प्रसंस्करण यूनिटों को सीधे सहायता देने की परिकल्पना की गई है।
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