पटाखों पर प्रतिबंध से निराश व्यापारियों की गुहार

पटाखों पर प्रतिबंध से व्यापारियों में निराशा 

भरे पड़े हैं गोदाम, लगेगी करोड़ों रुपए की चपत 

कहां खपाएं माल, सरकार से लगाई मदद की गुहार 

मेरठ। दीपावली के त्योहार पर अच्छा धंधा होने की आस में व्यापारियों ने करोड़ों केे पटाखे निर्धारित टैक्स देकर खरीदे। दीपावली पर इन पटाखों को बेचकर मुनाफा होने की उम्मीद थी, लेकिन एनजीटी के आदेश के बाद उनकी इस उम्मीद पर पानी फिर गया। सरकार से मदद की गुहार लगाते हुए व्यापारियों का कहना है कि एनजीटी के आदेश के बाद वह बर्बाद हो गए हैं। 
पश्चिम उप्र संयुक्त व्यापार मंडल के पदाधिकारियों ने मंगलवार को सीएम योगी को संबोधित ज्ञापन जिलाधिकारी को सौंपा। ज्ञापन में कहा कि कोरोना काल में व्यापारियों को पहले से ही काफी नुकसान हो चुका है। वहीं दीपावली के त्योहार की तैयारी करते हुए उन्होंने सभी तरह के टैक्स का भुगतान करते हुए पटाखों को खरीदा, इस उम्मीद के साथ कि इनको बेचकर  कोरोना काल के नुकसान की कुछ भरपाई हो सकेगी। अब राष्ट्रीय हरित अभिकरण के आदेश के बाद व्यापारी खुद को ठगा सा महसूस कर रहे हैं।
व्यापारियों का कहना है कि अगर सरकार को पटाखों पर प्रतिबंध लगाना था तो फिर दो महीने पहले इसकी घोषणा की जानी चाहिए थी। अब जब व्यापारियों ने करोड़ों रुपए के पटाखों को खरीद कर स्टाक कर लिया, तब इनपर प्रतिबंध लगाने का सीधा असर व्यापारियों पर पड़ा है। मेरठ में ही करीब साठ करोड़ रुपए के पटाखों का भण्डारन हो चुका है। व्यापारियों का कहना है कि उन्होंने अपने माल को जीएसटी व अन्य तरह के टैक्स भरकर खरीदा है। ऐसे में जब उनका माल बाजारों में बिकेगा ही नहीं तो वह उसका क्या करेंगे। व्यापारियों की मांग है कि सरकार उनके माल का मुआवजा दे और दीपावली पर ग्रीन पटाखे व हल्की आतिशबाजी बेचने की अनुमति प्रदान करे, जिससे व्यापारियों को होने वाले नुकसान से कुछ राहत मिल सके। 

कर्ज लेकर भी लगाते हैं पटाखों के धंधें में पैसा 
दीपावली पर पूरे देश में पटाखों की बिक्री अरबों रुपए में होती है। मेरठ के सरधना कस्बे में बनने वाले पटाखे पूरे देश में सप्लाई होते हैं, इसी तरह मवाना के सठला गांव में भी आतिशबाजी व पटाखे तैयार होते हैं।  इनकी तैयारी महिनों पहले से हो जाती है और कई व्यापारी तो कर्ज लेकर पटाखों के धंधें में पैसा लगाते हैं। अब जब अचानक एनजीटी ने पूरे एनसीआर में पटाखों पर बैन लगा दिया है तो व्यापारियों को मोटा नुकसान होना तय है। 
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