भ्रष्ट IPS को बचाने की जुगत में थे ex DG OP singh!

पूर्व DGP ओपी सिंह नहीं चाहते थे भ्रष्ट IPS अफसरों की जांच 

sanjay saxena 
लखनऊ। नोएडा के तत्कालीन एसएसपी वैभव कृष्ण के पांच IPS अधिकारियों पर लगाए गए भ्रष्टाचार की जांच कर रही SIT ने अपनी रिपोर्ट योगी सरकार को सौंप दी है। जांच रिपोर्ट में हुई देरी पर SIT ने यूपी के पूर्व DGP ओपी सिंह पर जानबूझकर जांच में सहयोग नही करने का आरोप लगाया है।
एसआईटी के मुताबिक जांच में देरी हो, इसके लिए तत्कालीन डीजीपी ओपी सिंह ने अपनी तरफ से भरपूर कोशिश की। एसआईटी ने अपनी रिपोर्ट में साफ तौर पर लिखा है कि जांच में देरी इसलिए भी हुई, क्योंकि डीजीपी ने पेन ड्राइव देने में 19 दिन लगा दिए।
एसआईटी ने शासन को भेजी अपनी रिपोर्ट में कहा है कि 10 और 13 जनवरी 2020 को तत्कालीन डीजीपी को पत्र लिखे थे। इसके बाद पेन ड्राइव दी गई, वह भी ओरिजिनल नहीं मिली। एसआईटी को पेन ड्राइव की कॉपी दी गई। जांच रिपोर्ट में ये भी आरोप लगाया गया है कि कई आईपीएस अधिकारियों की पोस्टिंग के लिये बड़े अधिकारियों को फायदा पहुंचा। ये बात पहले ही सामने आ चुकी है कि ट्रांसफर की डील के लिए लखनऊ के एक मॉल में ₹ की डील हुई और फिर बाद में कई लोगों को उनकी पसंदीदा जगह तैनाती मिली। 

नोएडा के एसएसपी रहे वैभव कृष्ण ने पांच आईपीएस अधिकारियों डॉक्टर अजयपाल शर्मा, हिमांशु कुमार, सुधीर सिंह, गणेश साहा, राजीव नारायण मिश्रा पर भ्रष्टाचार के आरोप लगाए थे। वैभव कृष्ण ने एक पेन ड्राइव में साक्ष्य भी भेजे थे। इन आरोपों को गंभीरता से लेते हुए मुख्यमंत्री ने मामले की जांच एसआईटी से कराने के आदेश दिए थे। एसआईटी का गठन तब विजिलेंस के निदेशक रहे एचसी अवस्थी के नेतृत्व में किया गया था। 
एचसी अवस्थी अब हैं डीजीपी 
तत्कालीन डीजीपी ओपी सिंह अब रिटायर हो चुके हैं। भ्रष्टाचार के आरोपी पांच अधिकारियों में से दो अधिकारियों अजयपाल शर्मा, हिमांशु कुमार के खिलाफ निलंबन की कार्रवाई भी हो चुकी है। अन्य अधिकारियों के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं हुई है।
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