फास्ट क्यों हाेती है ऑप्टिकल फ़ाइबर इंटरनेट की speed ?

Technology: क्या है ऑप्टिकल फ़ाइबर? 

क्यों फास्ट हाेती है फ़ाइबर इंटरनेट की speed ? 

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बदलते जमाने के साथ अब इंटरनेट सप्लाई भी पहले के मुकाबले काफी बदल चुकी है। फिक्स लाइन की अपेक्षा अब फ़ाइबर इंटरनेट काफ़ी पॉपुलर है, हालांकि कुछ समय पहले तक ब्रॉडबैंड कनेक्शन फाइबर बेस्ड कम ही होते थे। वायरलेस, वाईमैक्स का यूज किया जाता था, या फिर नॉर्मल इंटरनेट केबल के ज़रिए यूज़र्स को इंटरनेट दिया जाता था। अब हर जगह फ़ाइबर इंटरनेट की मांग बढ़ती जा रही है,  क्योकि फ़ाइबर इंटरनेट से स्पीड ज़्यादा हासिल की जा सकती है यानी इससे ज़्यादा तेज़ी से डेटा ट्रांसफ़र होता है। 

1950 में किया गया था मेडिकल यूज के लिए तैयार 

इंटरनेट की दुनिया में फाइबर काफ़ी सालों से इस्तेमाल किया जाता है। सबसे पहले फ़ाइबर केबल्स को साल 1950 में मेडिकल यूज के लिए तैयार किया गया था। इससे ये लाभ था कि बिना बड़ी सर्जरी किए हुए फ़ाइबर केबल के ज़रिए डॉक्टर्स मरीज़ की बॉडी के अंदर देख सकें इसके लिए इसका ईजाद किया गया था। 

बिना फाइबर के मुमकिन नहीं इंटरनेट का जाल 

एक तरह से कहा जाए तो पूरी दुनिया में जो इंटरनेट का जाल है वो बिना फाइबर के मुमकिन नहीं है। फाइबर दुनिया भर में एक स्पाइडर वेब की तरह बिछे हैं और यही वजह है कि आपके पास इंटरनेट पहुँच रहा है। 

क्या होते हैं ऑप्टिकल फाइबर?

आपको अच्छे से समझाने के लिए हम फ़ाइबर ऑप्टिक्स को ट्रांसमिशन के माध्यम के तौर पर समझाते हैं। आप इसे एक पतला पाइप की तरह भी समझ सकते हैं जिसके अग्र लाइट की स्पीड से डेटा ट्रैलव करते हैं। फाइबर केबल बहुत ही महीन होते है यानि बालों से भी बारीक होते हैं और इनकी लंबाई भी काफी होती है। यूज करते समय ये टूट न जाए इसके लिए एक साथ कई बाल से भी बारीक फाइबर ऑप्टिक्स को एक आउटर लेयर से प्रोटेक्ट किया जाता है। इसके बादे इन्हें एक मजबूत बंडल में रखा जाता है, जिसे ऑप्टिकल केबल कहा जाता है। फाइबर ऑप्टिक्स की ख़ासियत ये होती है कि ये लंबी दूरी तक लाइट के ज़रिए डेटा ले जाते हैं। चूँकि लाइट की स्पीड काफ़ी ज़्यादा है, इसलिए इन्हें डेटा ट्रांसमिट करने के लिए इस्तेमाल में लाया जाता है। अगर आप फाइबर ऑप्टिक्स को ध्यान से देखेंगे तो पाएँगे कि बाल से भी बारीक वायर के अंदर ख़ाली स्पेस होता है। 

लेजर लाइट से कर सकते हैं टेस्ट.. 

ख़ाली स्पेस में एक छोर से आप लेजर मारेंगे तो दूसरे छोर पर उस लाइट को आप आसानी से देख पाएँगे। ये तकनीक तब यूज की जाती है जब कोई समस्या हो जाए या ऑप्टिकल फाइबर कट जाए या फिर इसमें कोई दिक़्क़त होती है। एक केबल के अंदर एक से ज़्यादा फ़ाइबर स्ट्रैंड्स रहते हैं, यहां तक कि समुद्र के अंदर से जो केबल जाते हैं, उनमें हज़ारों पतले पतले फाइबर होते हैं। उन्हें एक केबल के अंदर रखा जाता है। इन्हें कोर भी कहा जाता है,. यानी एक केबल में 10 फ़ाइबर जा रहे हैं तो आप इन्हें 10 कोर कह सकते हैं। 

इन्हें काफ़ी पास से देखने पर आप ग्लास भी देख सकते है. इसके अलावा यहाँ कोर, क्लैडिंग और बफ़र कोटिंग किए हाेते हैं। कोर यानी फ़ाइबर के अंदर पतले ग्लास, जहां से लाइट ट्रैवल करता रहता है। क्लैडिंग, आउटर ऑप्टिकल मेटेरियल है, जो इसलिए यूज किया जाता है कि लाइट यहाँ से रिफ्लेक्ट हो कर कोर तक जा सके और बाहर न निकल सके, अंदर ही रहे। बफ़र कोटिंग एक प्लास्टिक कोटिंग है जो फ़ाइबर को डैमेज होने से बचाता है। इससे बाहर भी आउटर लेयर होता है जिसे जैकेट भी कहते हैं। 

ऐसे काम करता है फाइबर ऑप्टिक्स

आसानी से समझने के लिए आप इसे एक पाइप की तरह समझिए, जिसमें लाइट के ज़रिए डेटा ट्रांसमिट होते हैं। फ़ाइबर ऑप्टिक्स के वॉल को इस तरह से डिज़ाइन किया जाता है, जिससे लाइट इससे टकरा कर काफ़ी दूर तक चली जाए और इधर उधर फैल न सकें। अगर तार कहीं से मुड़ जाए तो ऐसी स्थिति में तो लाइट आगे नहीं जा पाएगी। इसका मतलब ये है कि इंटरनेट बंद हो जाता है। इस समस्या को रोकने के लिए केबल के अंदर क्लैडिंग होती है, जिसके ज़रिए लाइट लगातार बाउंस करता है। क्लैडिंग को मिरर लाइन्ड वॉल्स भी कहा जाता है। क्लैडिंग लाइट को अबजोर्व नहीं करता है, इसलिए लाइट आगे की ओर ही जा रही होती है। इन्हीं वजहों से लाइट कई किलोमीटर तक आराम से ट्रैवल करती है। 

फ़ाइबर ऑप्टिक्स क्यों है फ़ास्ट और सिक्योर?

चूंकि यहां लाइट के ज़रिए डेटा ट्रैवल करता है, ज़ाहिर है वैक्यूम में लाइट की स्पीड लगभग 3 लाख किलोमीटर प्रति सेकंड तक अचीव की जाती है तो आप अंदाज़ा लगा सकते हैं कि डेटा कितनी तेज़ी से ट्रैवल कर सकता है। लाइट से तेज़ फ़िलहाल कुछ भी नहीं है और फ़ाइबर ऑप्टिक्स में इसी का यूज होता है। ट्रेडिशन इंटरनेट केबल की बात करें तो इसमें इलेक्ट्रकिल सिग्नल से ट्रांसमिशन होता है जो लाइट के मुक़ाबले काफ़ी स्लो है। कॉपर और सैटेलाइट के मुक़ाबले भी फाइबर ऑप्टिक केबल्स तेज़ी से डेटा ट्रांसमिट करते हैं। फाइबर ऑप्टिक को डेटा सिक्योरिटी के लिहाज़ से भी बेहतर माना जाता है, क्योंकि फ़ाइबर ऑप्टिक केबल को हैक कर पाना सैटेलाइट और कॉपर वायर की तुलना में मुश्किल और महंगा है। 

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