न मानक, न योग्य प्रवक्ता, फिर भी धड़ल्ले से खुल रहे महाविद्यालय

न मानक, न योग्य प्रवक्ता, फिर भी धड़ल्ले से खुल रहे महाविद्यालय


नियमों को दरकिनार कर दी जा रही मान्यताएं

बिजनौर। निजी महाविद्यालयों में न मानकों का ख्याल रखा जा रहा है और न ही योग्य प्रवक्ताओं की तैनाती की जा रही है फिर भी इन कालेजों की संख्या कुकरमुत्तों की तरह बढ़ती जा रही है। यूनिवर्सिटी से नियमों को दरकिनार कर मान्यता दी जा रही हैं तथा अन्य एजेंसीज भी अपनी आंखे मूंदे हुए हैं। इन कालेजों में न केवल अभिभावकों की जेबें काटी जा रही हैं बल्कि छात्र-छात्राओं के जीवन से भी खिलवाड़ किया जा रहा है।
प्रदेशभर में उच्चशिक्षण संस्थान कुक्करमुत्तों की तरह उगते जा रहे हैं। इसका कारण विश्वविद्यालय कें प्रशासनिक अधिकारियों द्वारा सरकार के निर्धारित मांनकों को दरकिनार कर मान्यता प्रदान करना माना जा रहा है। अन्य सरकारी एजेन्सिज भी इन मानक विहिन महाविद्यालयों की संस्तुति करते समय अपनी आंखें ही बंद कर लेती हैं। यही कारण है कि उच्चशिक्षा के क्षेत्र में बड़े-बड़े शिक्षा माफियाओं ने अंगद पैर जमा लिया है। जिला बिजनौर की बात करें तो अनेक शिक्षण संस्थानों में एक ही कैंपस में एक से अधिक महाविद्याल की मान्यता ली गई है, जबकि सरकार द्वारा एक निर्धारित दूरी के बाद किसी अन्य महाविद्यालय को मान्यता प्रदान किए जाने का प्रावधान है। किसी महाविद्यालय के लिए भौतिक संशाधनों की बात की जाए तो एक निर्धारित माप के साथ ही कमरों की संख्या भी निर्धारित होती है, लेकिन अधिंकांश महाविद्यालयों में विषयों के अनुरूप कमरे ही नहीे है। सुसज्जित प्रयोगशाला का होना अनिवार्य है लेकिन एक ही कैंपस में कई महाविद्यालय होने के कारण एक प्रयोगशाला से काम चलाया जा रहा। यह प्रयोगशाला उन सभी महाविद्यालयों की प्रयोगशाला के रूप में कार्य करती है जिनकी मान्यता ली गई है। वही कई महाविद्यालयों में तो प्रयोगशाला है ही नहीं। यूजीसी द्वारा निर्धारित योग्यता वाले प्रवक्ता व प्राचार्य तक नहीं। जिनका विश्वविद्यालय से अप्रूवल लिया जाता है, उनमें से अधिकांश किसी अन्य महाविद्यालय में अपनी सेवाएं दे रहे होते हैं। विश्वविद्यालय द्वारा प्रचार्याें के अनुभव योग्यता की बात की जाए तो कहीं 2वर्ष वाले तो कहीं 5 वर्ष के अनुभव को मानक माना गया है। इस गोलमाल का मुख्य कारण एमजेपी समेत अन्य विश्वविद्यालयों द्वारा प्रवक्ताओं व प्रचार्यों के आधार का लिंक नहीं किया जाना है। अब देेखना यह है कि शिक्षा क्षेत्र से माफियागिरी पर कब लगाम कसेगी। 

(सौजन्य से-target tv)

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