शहद में चीनी की मिलावट कर रही कंपनियां! जांच करेगी FSSAI
केंद्रीय उपभोक्ता संरक्षण प्राधिकरण ने शहद में मिलावट का मामला खाद्य नियामक एफएसएसएआई को सौंपा
नए उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम की धारा 10 के तहत उचित कार्रवाई के लिए जांच में सहयोग देने की पेशकश
विभाग उपभोक्ता मामलों को गंभीरता से लेता है। हाल ही में, एक मोबाइल फोन सेवा केंद्र द्वारा फोन बदलने से मना करने पर रोहिणी मॉल में एक व्यक्ति द्वारा खुद को आग लगाकर जलने से घायल होने की घटना के बाद विभाग ने यह मामला मोबाइल कंपनी के समक्ष उठाया। 40 वर्षीय इस व्यक्ति ने यह फोन अपनी 12वीं क्लास में पढ़ने वाली भतीजी की ऑनलाइन क्लासेज के लिए खरीदा था। मोबाइल कंपनी ने सूचित किया कि उन्होंने उपभोक्ता को 1,00,000 लाख रुपये मुआवजा और एक नया मोबाइल हैंडसेट देने का फैसला लिया है।
किसी भी अर्थव्यवस्था के प्रभावी कामकाज के लिए सही, शुद्ध और मानक वजन व माप का प्रयोग बेहद महत्वपूर्ण है क्योंकि यह उपभोक्ता संरक्षण में अति आवश्यक भूमिका अदा करता है। कम माप और वजन से जुड़े कदाचार से उपभोक्ता का संरक्षण सरकार का अहम दायित्व है। विधिक माप विज्ञान (पैकेज में रखी वस्तुएं) नियम, 2011 को पहले से पैक वस्तुएं के विनियमन के लिए बनाया गया है। इन नियमों के तहत, पहले से पैक वस्तुओं को उपभोक्ता के हितों में विक्रेता द्वारा ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म पर कुछ आवश्यक सूचनाओं का अनुपालन करना होता है। यह देखा गया है कि कुछ ई-कॉमर्स संस्थाएं ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म्स पर उत्पाद की जानकारी की घोषणा की अनिवार्य आवश्यकता का उल्लघंन कर रही हैं। अतः नियमों का पालन ना करने के लिए विभिन्न ई-कॉमर्स संस्थाओं को नोटिस जारी किए गए हैं।
भारत सरकार के उपभोक्ता मामले, खाद्य और सार्वजनिक वितरण मंत्रालय का उपभोक्ता मामले विभाग उपभोक्ता संरक्षण हेतु नोडल विभाग है और उपभोक्ताओं के हितों एवं अधिकारों की रक्षा के लिए यह विभिन्न उपाय कर रहा है। 20 जुलाई 2020 से उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम, 2019 लागू हुआ है जो उपभोक्ता विवादों के सरल एवं शीघ्र निवारण के लिए तीन स्तरीय अर्ध-न्यायिक तंत्र उपलब्ध करवाता है। झूठे या भ्रामक विज्ञापनों, अनुचित व्यापार पद्धति, उपभोक्ता के अधिकारों के अतिक्रमण से संबंधित मामलों के विनियमन के लिए एक केंद्रीय उपभोक्ता संरक्षण प्राधिकरण (सीसीपीए) की स्थापना की गई है जो जनता के हितों के लिए कार्य करता है और उपभोक्ताओं को एक वर्ग के रूप में मानकर उनके अधिकारों को लागू, संरक्षित और बढ़ावा देता है।
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