दुःखद:ओबामा ने की राहुल गांधी की अंतरराष्ट्रीय बेइज्जती!
'राहुल में योग्यता और जुनून की कमी'
‘ए प्रॉमिस्ड लैंड’ के अनुसार, वह घबराए और अनगढ़ छात्र
न्यूयाॉर्क। अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति बराक ओबामा का कहतें हैैं कि कांग्रेस नेता राहुल गांधी में एक ऐसे ‘घबराए हुए और अनगढ़’ छात्र के गुण हैं जो अपने शिक्षक को प्रभावित करने की चाहत रखता है, लेकिन उसमें ‘विषय में महारत हासिल’ करने की योग्यता और जुनून की कमी है।
17 नवंबर को होगा बाजार में उपलब्ध
ओबामा का 768 पन्नों का यह संस्मरण ‘ए प्रॉमिस्ड लैंड’ 17 नवंबर को बाजार में आने वाला है। अमेरिका के पहले अफ्रीकी-अमेरिकी राष्ट्रपति ओबामा ने अपने कार्यकाल में दो बार 2010 और 2015 में भारत की यात्रा की थी।
न्यूयॉर्क टाइम्स की समीक्षा
न्यूयॉर्क टाइम्स ने ओबामा के संस्मरण ‘ए प्रॉमिस्ड लैंड’ की समीक्षा के अनुसार पूर्व राष्ट्रपति ने दुनियाभर के राजनीतिक नेताओं के अलावा अन्य विषयों पर भी बात की है।
राहुल गांधी के बारे में ओबामा का कहना है कि उनमें एक ऐसे ‘घबराए हुए और अनगढ़’ छात्र के गुण हैं जिसने अपना पूरा पाठ्यक्रम पूरा कर लिया है और वह अपने शिक्षक को प्रभावित करने की चाहत रखता है, लेकिन उसमें ‘विषय में महारत हासिल’ करने की योग्यता या फिर जूनून की कमी है।
सोनिया गांधी का भी जिक्र
संस्मरण में ओबामा ने राहुल की मां कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी का भी जिक्र किया है। समीक्षा में कहा गया है- हमें चार्ली क्रिस्ट और रहम एमैनुएल जैसे पुरुषों के हैंडसम होने के बारे में बताया जाता है लेकिन महिलाओं के सौंदर्य के बारे में नहीं। सिर्फ एक या दो उदाहरण ही अपवाद हैं जैसे सोनिया गांधी।
बॉब-मनमोहन में तुलना
समीक्षा में कहा गया है कि अमेरिका के पूर्व रक्षा मंत्री बॉब गेट्स और भारत के पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह दोनों में बिलकुल भावशून्य सच्चाई/ईमानदारी है। इसमें कहा गया है कि रूस के राष्ट्रपति व्लादिमिर पुतिन ओबामा को शिकागो मशीन चलाने वाले मजबूत, चालाक बॉस की याद दिलाते हैं। पुतिन के बारे में ओबामा लिखते हैं कि शारीरीक रूप से वह साधारण हैं।
सोशल मीडिया पर मचा बवाल
इस किताब को लेकर सोशल मीडिया पर बवाल खड़ा हो गया है। ये इतना ज्यादा है कि ट्विटर पर '#माफ़ी_माँग_ओबामा' हैशटैग काफी ट्रेंड कर रहा है। इसी बहाने कुछ लोग राहुल गांधी पर तंज भी कस रहे हैं।
....लेकिन सोचना होगा देशवासियों को
भारत में किसी को किस नजर से देखा जाता है या देखा जाए! ये हमारे देश का अंदरूनी मामला है। किसी भी अन्य को इसकी न तो आवश्यकता है और न ही इजाजत दी जानी चाहिए।
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