कायस्थ 24 घंटे के लिए क्यों नहीं करते कलम का उपयोग!

कायस्थ 24 घंटे के लिए क्यों नहीं करते कलम का उपयोग! 

Sunday 15 nov 2020 
Sanjay Saxena 

जब भगवान राम के राजतिलक में निमंत्रण छूट जाने से नाराज भगवान चित्रगुप्त ने रख दी थी कलम!! उस समय परेवा काल शुरू हो चुका था। परेवा के दिन कायस्थ कलम का प्रयोग नहीं करते हैं यानि किसी भी तरह का का हिसाब किताब नहीं करते। आखिर ऐसा क्यों है कि पूरी दुनिया में कायस्थ समाज के लोग दीपावली के दिन पूजन के बाद कलम रख देते हैं और फिर यम द्वितीया के दिन कलम-दवात के पूजन के बाद ही उसे उठाते हैं? इसको लेकर सर्व समाज में कई सवाल अक्सर लोग कायस्थों से करते हैं? ऐसे में अपने ही इतिहास से अनभिग्य कायस्थ युवा पीढ़ी इसका कोई समुचित उत्तर नहीं दे पाती है। जब इसकी खोज की गई तो इससे सम्बंधित एक बहुत रोचक घटना का संदर्भ किवदंतियों में मिला। 

भगवान राम के राज्यतिलक में नहीं पहुंचा था निमंत्रण 
कहते हैं कि जब भगवान राम दशानन रावण को मार कर अयोध्या लौट रहे थे, तब उनके खडाऊं को राजसिंहासन पर रख कर राज्य चला रहे राजा भरत ने गुरु वशिष्ठ को भगवान राम के राज्यतिलक के लिए सभी देवी देवताओं को सन्देश भेजने की  व्यवस्था करने को कहा। गुरु वशिष्ठ ने ये काम अपने शिष्यों को सौंप कर राज्यतिलक की तैयारी शुरू कर दीं। जब राज्यतिलक में सभी देवी देवता आ गए तब भगवान राम ने अपने अनुज भरत से पूछा भगवान चित्रगुप्त जी नहीं दिखाई दे रहे हैं। इस पर जब खोजबीन हुई तो पता चला कि गुरु वशिष्ठ के शिष्यों ने भगवान चित्रगुप्त को निमंत्रण पहुंचाया ही नहीं था, जिसके चलते वह नहीं आये। इधर भगवान चित्रगुप्त सब जान चुके थे और इसे प्रभु राम की महिमा समझ रहे थे। फलस्वरूप उन्होंने गुरु वशिष्ठ की इस भूल को अक्षम्य मानते हुए यमलोक में सभी प्राणियों का लेखा जोखा लिखने वाली कलम को उठा कर किनारे रख दिया। सभी देवी देवता जैसे ही राजतिलक से लौटे तो पाया की स्वर्ग और नरक के सारे काम रुक गये थे, प्राणियों का का लेखा जोखा ना लिखे जाने के चलते ये तय कर पाना मुश्किल हो रहा था कि किसको कहां भेजें? 

भगवान श्रीराम गए थे मनाने 
तब गुरु वशिष्ठ की इस गलती को समझते हुए भगवान राम ने अयोध्या में भगवान विष्णु द्वारा स्थापित भगवान चित्रगुप्त के मंदिर (श्री अयोध्या महात्मय में भी इसे श्री धर्म हरि मंदिर कहा गया है धार्मिक मान्यता है कि अयोध्या आने वाले सभी तीर्थयात्रियों को अनिवार्यत: श्री धर्म-हरि जी के दर्शन करना चाहिये, अन्यथा उसे इस तीर्थ यात्रा का पुण्यफल प्राप्त नहीं होता) में गुरु वशिष्ठ के साथ जाकर भगवान चित्रगुप्त की स्तुति की और गुरु वशिष्ठ की गलती के लिए क्षमायाचना की, जिसके बाद भगवान राम का आग्रह मानकर भगवान चित्रगुप्त ने लगभग ४ पहर (२४ घंटे बाद ) पुन: कलम दवात की पूजा करने के पश्चात उसको उठाया और प्राणियों का लेखाजोखा लिखने का कार्य आरम्भ किया। कहते हैं कि तभी से कायस्थ दीपावली की पूजा के पश्चात कलम को रख देते हैं और यम द्वितीया के दिन भगवान चित्रगुप्त का विधिवत कलम दवात पूजन करके ही कलम को धारण करते हैं। 

ब्राह्मणों के लिए भी पूजनीय हुए कायस्थ 
कहते हैं कि तभी से कायस्थ, ब्राह्मणों के लिए भी पूजनीय हुए और इस घटना के पश्चात मिले वरदान के फलस्वरूप सबसे दान लेने वाले ब्राह्मणों से दान लेने का अधिकार सिर्फ कायस्थों को ही है। 
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