पत्रकारों से धोखा कर रहे मीडिया संस्थान


देश के सबसे बड़े मीडिया ग्रुप इंडिया टुडे ने अपने दैनिक अखबार मेल टुडे में लाकडाउन की घोषणा कर दी! एक ही झटके में पचासों पत्रकार और अन्य अखबारकर्मी सड़क पर आ गए। 
अरुण पुरी ने पत्र लिखकर बताया कि 9 अगस्त, रविवार का अंक आखिरी होगा।
इससे पहले पत्रिका ने अपना मुम्बई एडिशन बंद कर दिया। कई सपने लेकर हिन्दी प्रदेशों से मुंबई गए युवा पत्रकार बैरंग वापस लौट रहे हैं। 
निकाले जा रहे पत्रकारों को कोई मुआवजा नहीं दिया जा रहा है। पिछले पांच महीनों में सैंकड़ों पत्रकारों की नौकरी चली गई है। जो छंटनी से बच गए हैं, उनकी तनखाएं कम कर दी गई हैं। प्रधानमंत्री मोदी ने मार्च में लाकडाउन लगाते समय कहा था कि किसी की नौकरी नहीं जाना चाहिए। मीडिया ने इसे खूब चलाया मगर अमल उल्टा किया। छंटनी की शुरूआत सबसे पहले बड़े मीडिया संस्थानों से ही हुई। घबराए हुए पत्रकारों में आत्महत्या का नया सिलसिला शुरू हो गया। इसकी कोई जांच नहीं हो रही। पत्रकारों के पीड़ित परिवारों को सरकार और मीडिया संस्थानों की तरफ से कोई राहत नहीं दी जा रही। इसी तरह प्रधानमंत्री ने पत्रकारों को कोरोना योद्धा कहा। उनके लिए ताली थाली बजवाई गई। पत्रकारों ने भी बड़े जोश से थालियां बजाईं। एक पत्रकार के पिता नहीं रहे, अन्त्येष्टि के लिए पैसे नहीं। सोचिए क्या हुआ होगा। फोटोग्राफरों ने आपस में मिलकर सहयोग किया। अभी भास्कर के पत्रकार की एम्स से कूदकर आत्महत्या के बाद उनके पत्रकार साथियों ने ही परिवार के लिए कुछ पैसा इकट्ठा किया। न्यूज चैनल की एक युवा महिला पत्रकार ने आत्महत्या की, कहीं खबर तक नहीं बनीं।
----

Comments

Popular posts from this blog

अब नोएडा में भी मेहमानों की लिस्ट हुई छोटी

अर्नब गोस्वामी को अंतरिम जमानत

पटाखों पर प्रतिबंध से निराश व्यापारियों की गुहार