गृहस्थजनों के लिए श्री कृष्ण जन्माष्टमी व्रत 11 अगस्त को
श्री कृष्ण जन्माष्टमी व्रत
11 अगस्त गृहस्थजन स्मार्त, 12 अगस्त वैष्णव
जगन्नाथ पुरी, काशी और उज्जैन में 11 अगस्त को जन्माष्टमी मनाई जाएगी, जबकि मथुरा और द्वारिका में 12 अगस्त को जन्मोत्सव
भगवान श्री कृष्ण का जन्म भाद्रपद में कृष्ण पक्ष की अष्टमी को रोहणी नक्षत्र में अर्धरात्रि में वृष के चन्द्रमा में हुआ था। इस वर्ष भगवान श्री कृष्ण का 5247वां जन्मोत्सव है। इस वर्ष अष्टमी तिथि 11 अगस्त मंगलवार को सुबह 09:06 से प्रारम्भ होकर 12 अगस्त बुधवार को सुबह 11:15 तक है। इस बार अष्टमी तिथि और रोहिणी नक्षत्र दोनों एक साथ नहीं बन रहे हैं। जन्माष्टमी के दिन 11 अगस्त को भरणी नक्षत्र और 12 अगस्त को कृतिका नक्षत्र रहेगा। इसके अलावा इस दिन चंद्रमा मेष राशि में और सूर्य कर्क राशि में रहेगा। स्मार्त अर्धरात्रि को पड़ रही अष्टमी वाले दिन जन्माष्टमी मनाते है जो 11 अगस्त को है। जबकि वैष्णव अष्टमी की उदया तिथि को जन्माष्टमी गोकुलाष्टमी मनाते हैं जो 12 अगस्त को है। स्मार्त 5 देवों भगवान विष्णु, शिव, दुर्गा, गणेश और सूर्य की उपासना करते हैं। वहीं वैष्णव अपने सम्प्रदाय के गुरू से गुरू दीक्षा लेकर कंठी, माला, तिलक आदि नियम पालन करते हैं और केवल श्री कृष्ण वैष्णव उपासना करते हैं। जगन्नाथ पुरी, काशी और उज्जैन में 11 अगस्त को जन्माष्टमी मनाई जाएगी, जबकि मथुरा और द्वारिका में 12 अगस्त को जन्मोत्सव मनाया जाएगा।
कृष्ण जन्माष्टमी को कृष्णाष्टमी, गोकुलाष्टमी, कन्हैया अष्टमी, श्रीकृष्ण जयंती नामों से भी जाना जाता है। पूरे देश में जन्माष्टमी धूमधाम से मनाई जाती है। मध्य रात्रि पूजा का शुभ मुहूर्त 11 अगस्त रात 11:50 से 12:33 तक है। जन्माष्टमी में उपवास रखकर रात्रि में जागरण एवं भगवान का पूजन, भजन-कीर्तन से किया जाता है। भगवान श्री कृष्ण ने पूतना, शकटासुर, नरकासुर, कंस, जरासंध, शिशुपाल, पौड्रक आदि असुरों का वध किया था। 12 अगस्त को महाराष्ट्र, गुजरात में दही हांडी उत्सव मनाया जायेगा।
-ज्योतिषाचार्य
एसएस नागपाल, लखनऊ।
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