कुख्यात डकैत भी हो चुके फरार
बांदा में फरारी, कोई नई बात नहीं
लखनऊ। बीते वर्षों की बात करें तो बांदा क्षेत्र में कई अपराधी फरार होने में कामयाब हो चुके हैं। इसके बावजूद लापरवाही चरम पर है।
22 मार्च 2006 को डकैत पप्पू यादव अपने साथी विजय यादव के साथ पुलिस कर्मियों की राइफलें लूट कर पुलिस अभिरक्षा से फरार हो गया।
03 फरवरी 2007 को मंडल कारागार में निरुद्ध भूरा सिंह, विनोद, रामबाबू जेल की चारदीवारी फांद कर रफूचक्कर हो गए।
03 सितंबर 2008 को ददुआ गैंग का हार्डकोर सदस्य और 50 हजार का इनामी डकैत राजू कोल पेशी से लौटते समय ट्रेन से कूदकर भाग निकला।
13 जुलाई 2011 को शहर कोतवाली क्षेत्र के गुलाब बाग निवासी उस्मान उर्फ लादेन और सिंधनकलां (पैलानी) निवासी जितेंद्र उर्फ पिंटू कचहरी परिसर से पुलिस कर्मियों को बेहोश करने के बाद भाग निकले।
09 अप्रैल 2012 को कालिंजर नरसंहार का आरोपी अनुराग मिश्र उर्फ राजू सतना हथकड़ी समेत फरार हो गया।
08 अगस्त 2012 चित्रकूट में अदालत से पेशी के बाद वापस बांदा जेल लौट रहे 13 बंदी पुलिस कर्मियों की सरकारी राइफल लेकर भागे।
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