चीन ने दुनिया से छिपाया था कोरोना का सच
कोरोना: चीनी साइंटिस्ट को थी अपनी हत्या की आशंका
भागकर ली अमेरिका की शरण
वाशिंगटन। दुनिया को बताने के काफी पहले से चीन को कोरोना वायरस के बारे में पता था।
इस मामले में जानकारी देते हुए एक प्रमुख चीनी साइंटिस्ट डॉ. ली मेंग यान ने कहा कि सुपरवाइजर ने उनकी रिसर्च को भी नजरअंदाज कर दिया, जिससे लोगों की जिंदगी बच सकती थी।
अप्रैल महीने के आखिर दिनों में ली मेंग यान हॉन्गकॉन्ग से भागकर अमेरिका चली गईं थीं। ली मेंग हॉन्गकॉन्ग स्कूल ऑफ पब्लिक हेल्थ में वायरोलॉजी और इम्यूनोलॉजी की एक्सपर्ट रही हैं। ली ने कहा कि कैंपस से निकलते वक्त उन्होंने बेहद सावधानी बरती ताकि सेंसर और कैमरों की नजर से बच सकें, क्योंकि उन्हें डर था कि अगर पकड़ी गईं तो उन्हें जेल में बंद कर दिया जाएगा या फिर उन्हें 'गायब' भी किया जा सकता है।
जान बचा कर भागी थी वैज्ञानिक
अमेरिकी टीवी चैनल फॉक्स न्यूज से बात करते हुए ली मेंग यान ने बताया कि चीन की सरकार उनकी प्रतिष्ठा को खत्म करने की कोशिश में थी और उन्हें शांत करवाने के लिए साइबर अटैक करवाए, जिसके बाद उन्हें वहां खतरा महसूस होने लगा। वे अब कभी अपने घर लौट नहीं पाएंगी। अगर वे कोरोना से जुड़ी सच्चाई चीन में बतातीं तो उन्हें जान से मार दिया जाता।
यान का यह दावा है किया कि वे दुनिया के चुनिंदा साइंटिस्ट में शामिल थीं, जिन्होंने सबसे पहले कोरोना वायरस पर स्टडी की। चीन ने दिसंबर 2019 में हॉन्गकॉन्ग के एक्सपर्ट को भी कोरोना पर रिसर्च करने से रोक दिया था, जिसके बाद उन्होंने अपने जानने वालों से कोरोना की जानकारी जुटाई।
समय पर नहीं की जांच, इलाज
चीन में ही पली बढ़ी और पढ़ाई करने वाली यान को चीन के सेंटर फॉर डिजीज कंट्रोल एंड प्रीवेंशन के साइंटिस्ट ने 31 दिसंबर 2019 को ही बता दिया था कि कोरोना इंसान से इंसान में फैलता है, लेकिन तब तक चीन ने WHO या दुनिया को इसकी जानकारी नहीं दी थी। ली मेंग यान ने कहा कि कोरोना के मामले सामने आने के बाद शुरुआत में चीन के ज्यादातर डॉक्टर्स कहने लगे- 'हम इसके बारे में बात नहीं कर सकते। हमें मास्क पहनने की जरूरत है।' यान ने कहा कि काफी मरीजों की समय पर जांच नहीं की गई और समय पर इलाज नहीं किया गया।
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