बांदा जेल से फरार बच्छराज का नहीं सुराग

मंडल कारागार बांदा से फरार अपराधी का चौथे दिन नहीं मिला सुराग 

काम न करने के एवज में प्रति बंदी वसूले जाते 2 हजार रूपए 

रकम न दी तो भंडारे में माड़ो आंटा, चलाओ कुदाल-फावड़े 

(बांदा से केएस दुबे AMJA) 

लखनऊ। कमान के नाम पर बंदियों से की जाने वाली नाजायज वसूली का नतीजा है प्रदेश की सबसे सुरक्षित कहे जाने वाले मंडल कारागार से हिस्ट्रीशीटर अपराधी का फरार हो जाना। यही नाजायज कमान का पैसा न दे पाने पर इस हिस्ट्रीशीटर की बगिया कमान भरी गई थी। कथित तौर पर सजा कहलाने वाली इस कमान में बंदियो से जेल भर में न केवल फावड़े, कुदाल चलवाए जाते हैं बल्कि पूरी जेल परिसर की घास तक उखड़वाई जाती है। ऐसे बंदियों को जेल में हिकारत की नजरों से भी देखा जाता है। यही सब कारण बताए जा रहे हैं जो हिस्ट्रीशीटर बंदी की बर्दाश्त से बाहर हो गए थे।
बता दें कि मंडल कारागार में निरूद्ध कमासिन थाना क्षेत्र के ममसीखुर्द गांव निवासी बच्छराज यादव पुत्र रंजीत बीते गुरूवार दोपहर बगिया कमान से फरार हो गया था। इस शातिर अपराधी की तलाश में पुलिस की कई टीमें जगह-जगह दबिशें दे रही हैं लेकिन तीसरे दिन भी बंदी का कहीं कोई सुराग नहीं लग सका। मंडल कारागार से कैदी के फरार हो जाने को लेकर सूत्रों की मानें तो जेल पहुंचने वाले बंदियों से काम न करने के एवज में 2 हजार रूपए की वसूली की जाती है। बैरिक में पहुंचते ही बंदी से 300 रूपए और कुछ दिन बाद 1700 रूपए वसूल किए जाते हैं। जो बंदी कमान की रकम नहीं दे पाता उसे जेल मे टार्चर किया जाता है। हष्ट-पुष्ट मजबूत जवान हुआ तो भण्डारे में भेज दिया जाता है। वहां उससे कुन्तलों आंटा मड़वाया जाता है। बुजुर्ग और बीमार हुआ तो उनसे बैरिकों की साफ-सफाई और झाड़ू लगवाई जाती है। इसके अलावा बंदियों को कथित तौर पर बगिया कमान की सजा दे दी जाती है। बताते हैं कि बच्छराज बीती 14 जुलाई को जेल आया था। कमान की रकम न देने पर 16 जुलाई से उसकी बगिया कमान भर दी गई थी। ऐसे में उससे सारा दिन जेल में हाड़तोड़ मेहनत कराई जाती थी। सूत्र बताते हैं कि जेल के अन्य बंदी बगिया कमान भरे जाने से बच्छराज का मजाक उड़ाते थे। यह बात उसे नागवार गुजर रही थी। इसी को लेकर वह बगिया कमान से फरार हो गया। सूत्र तो यह भी बताते हैं कि इसके पहले भी जनवरी माह में बच्छराज जेल में बंद था तब यह जेल अस्पताल के समीप बने पानी के खाली टैंक में घुसकर छिप गया था। देर शाम तक जब उसका कुछ पता नहीं लगा था तब भी जेल से बंदी के फरार हो जाने को लेकर हड़कम्प मच गया था। रात लगभग 8 बजे बच्छराज को इस टैंक से ढूढ़ा जा सका था। 

सब्जी प्रति प्लेट 50 रूपए 
बांदा। मंडल जेल में पिछले एक सप्ताह से बंदियों के लिए मटर पनीर, कटहल आदि की चटपटी सब्जियां बनवाई जा रही थी। हैरान न हों, यह सब्जियां मुफ्त नहीं मिल रही थीं। बंदियों से इन सब्जियों के एवज में प्रति प्लेट 50 रूपए वसूले जा रहे थे। पैसा न दे पाने वाले बंदियों को यह सब्जियां नसीब नहीं हो पा रही थी। सूत्रों की माने तो जेल के अन्दर कथित तौर पर कैंटीन चलाई जा रही है। राशन पानी और किराने का सामान चौक बाजार स्थित एक पंसारी की दुकान से मंगाया जा रहा है। बंदियों को दोगुने, चौगुने रेट पर बंडल, सिगरेट और गुटखा पान-मसाला आदि परोसा जा रहा है।
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