आषाढ़ी पूर्णिमा, गुरू पूर्णिमा एवं व्यास पूर्णिमा 5 जुलाई को
आषाढ़ी पूर्णिमा, गुरू पूर्णिमा एवं व्यास पूर्णिमा 5 जुलाई को
आषाढ़ शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा वेद व्यास जी के जन्म दिन को गुरू पूर्णिमा के रूप में भी मनाया जाता है। इस वर्ष गुरू पूर्णिमा 5 जुलाई को है। पूर्णिमा तिथि 4 जुलाई को प्रातः 11:32 से प्रारंभ होकर 5 जुलाई को प्रातः 10:13 तक रहेगी। इस दिन कृष्ण द्वैपायन वेदव्यास का प्राकट्य हुआ। चतुर्वेदों को संहिताबद्व करने के कारण उनका नाम कृष्णद्वैपादन वेदव्यास पड़ा। उन्होंने चतुर्वेदों के अतिरिक्त 18 पुराणों, उपपुराणों, महाभारत, व्यास संहिता आदि ग्रंन्थों का प्रणयन किया। वेद व्यास जी को जगत गुरू भी कहते है। वेद व्यास जी के पिता ऋषि पाराशर और माता सत्यवती थी। इस दिन वेद व्यास, शंकराचार्य, ब्रहमा जी का विशेष पूजा किया जाता है। स्नान और पूजा आदि से निवृत्त होकर उत्तम वस्त्र धारण करके गुरू को वस्त्र, फल, फूल, माला व दक्षिणा अर्पण कर उनका आशीर्वाद प्राप्त करना चाहिए। गुरू का आशीर्वाद ही प्राणी मात्र के लिए कल्याणकारी व मंगल करने वाला होता है। यह गुरू की कृपा प्राप्त करने का विशिष्ट अवसर है। यह पर्व वैष्णव, शैव, शक्ति आदि सभी सम्प्रदायों में श्रद्वा-पूर्वक एवं उत्साह के साथ मनाया जाता है।
5 जुलाई को साल का तीसरा ग्रहण उपछाया ग्रहण है, जो अमेरिका, यूरोप और ऑस्ट्रेलिया के अधिकांश हिस्सों में दिखाई देगा। यह ग्रहण भारत में नहीं दिखाई देगा, इसलिए ग्रहण का सूतक काल मान्य नहीं होगा। उपच्छाया चंद्र ग्रहण गुरु पूर्णिमा के दिन भारतीय समयानुसार सुबह 8:37 पर शुरु होगा और सुबह 9:59 मिनट पर यह परमग्रास में होगा, जबकि ग्रहण का समापन दोपहर 11:22 पर होगा।
- (ज्योतिषाचार्य एस.एस. नागपाल, स्वास्तिक ज्योतिष केन्द्र, अलीगंज, लखनऊ।)
--------
सौजन्य से धारा आईटीआई-
Comments
Post a Comment