सीएमओ की खिलाफत की सजा! भाजपा से निष्कासन

सीएमओ की खिलाफत के बदले भाजपा से निष्कासन
Sanjay Saxena 
लखनऊ। पश्चिम उत्तर प्रदेश के बिजनौर में अनुशासनहीनता का मामला बताकर भाजपा ने नेहा शर्मा को पदमुक्त कर दिया, लेकिन इससे पार्टी ने क्या साबित करने का प्रयास किया, यह सवाल हर किसी के जेहन में कौंध रहा है कि भाजपाईयों को दलाल व बिकाऊ बताकर नगराध्यक्ष को 50 हजार देने का आरोप लगाने वाले सीएमओ के खिलाफ बगावत का बिगुल फूंकना अगर अपराध है तो प्रत्येक पार्टी के सच्चे सिपाही को ऐसा करना भी चाहिए। पार्टी नेत्री की शिकायत के बावजूद संवेदनशील मामले को नजर अंदाज करने पर भाजपा नेता पहले ही संदेह के घेरे में थे, अब  उनका यह कदम उन्हें अप्रत्यक्ष रूप से सीएमओ के साथ खड़ा होने का संदेश दे रहा है। फिलहाल विरोधी पक्ष सोशल मीडिया के माध्यम से भाजपा को घेरने में लगे है।  
भाजपा नेत्री नेहा शर्मा ने सीएमओ डा. विजय यादव के खिलाफ जंग छेड़ रखी थी। नेहा का कहना था कि जब वह एक मामले को लेकर सीएमओ के पास गई थी तो उन्हें अथवा पार्टी को सम्मान देने की जगह अपमान किया गया। नेहा की माने तो सीएमओ ने भाजपाईयों को बिकाऊ और दलाल कहते हुए समय पर हफ्ता देने की बात कही थी तथा भाजपा नगराध्यक्ष संजीव गुप्ता पर 50 हजार रूपए लेकर जाने का आरोप लगाया था। नेहा को अपनी पार्टी व संजीव गुप्ता की ईमानदारी पर पूरा यकीन था जिसके चलते उन्होंने सीएमओ का तभी विरोध किया व वायरल हुई वीडियो में भी कहते हुए दिखी। शायद नेहा अपना अपमान तो सह लेती लेकिन भाजपा की सच्ची सिपाही होने के नाते वह पार्टी व पार्टी नेताओं के प्रति अपशब्द सहन नहीं कर पाई। उन्होंने पार्टी के वरिष्ठ नेताओ समक्ष इस मुद्दे को रखा लेकिन किन्हीं कारणों के चलते पार्टी नेता इस मामले को नजरअंदाज करते दिखे। जब यह मामला मीडिया में छाया तो भाजपा नेत्री व सीएमओ की रार जगजाहिर हो गई और भाजपा नगरअध्यक्ष पर 50 हजार रूपए लेने व सीएमओ की निगाहों में भाजपाईयों की छवि दलाल व बिकाऊ की होने कह चर्चा भी लोगों की जुबान पर पहुंच गई।  इसके बाद नगर अध्यक्ष व सीएमओ की आपस में वार्ता करते हुए एक वीडियो जारी की गई जिसमें दोनों एक-दूसरे को क्लीन चिट देते दिख रहे थे। हालांकि भाजपा के नेता व नगर अध्यक्ष भी उसी बात को कह रहे थे जो कि नेहा ने कहा था कि संजीव गुप्ता ने रूपए नहीं लिए। भाजपा का हर सच्चा सिपाही पार्टी को बेदाग व इमानदार बताने की कोशिश कर रहा था, लेकिन इस घमासान की असली वजह सीएमओ हैं, जिन पर नेहा शर्मा ने भाजपा को अपमानित करने का आरोप लगाया था। लोगों का कहना है कि इस प्रकरण की पूरी सच्चाई तो उन्हें नहीं पता लेकिन इतनी बात जरूर सामने आ रही थी कि सीएमओ,  भाजपा के खिलाफ खड़े दिखे जबकि नेहा अपनी पार्टी के लिए लड़ती दिख रही थी। इस कारण उम्मीद जताई जा रही है कि भाजपा के वरिष्ठ नेता व नगराध्यक्ष पूरी तरह से नेहा के साथ खड़े दिखेंगे तथा सीएमओ को भाजपा का अनादर करने के लिए सबक सिखाएंगे, लेकिन गुरूवार शाम भाजपा की जिला नेताओं ने जो कदम उठाया उसकी लोग आलोचना करने से पीछे नहीं हट रहे हैं। दरअसल भाजपा नेत्री नेहा शर्मा को अनुसाशनहीनता के आरोप में पार्टी से निकाल दिया गया। जैसे ही पार्टी का आदेश जारी हुआ, यह मामला सोशल मीडिया पर छा गया। भाजपा विरोधी इस मामले को भुनाने से जरा भी नहीं चूक रहे हैं वहीं सीएमओ की कार्यशैली से नाराज लोग भी आलोचना करते दिख रहे हैं। लोगों के मन में प्रश्न खडे हो रहे हैं कि सीएमओ पर भाजपा को बिकाऊ और दलाल तथा नगर अध्यक्ष को 50 हजार रूपए देने के लिए कहने का आरोप लगने के बावजूद पार्टी के जिला नेता आखिरकार चुप क्यों रहे। पार्टी नेत्री बार-बार शिकायत करती रहीं। अगर सीएमओ ने झूठ बोला था तो पार्टी के वरिष्ठ नेताओं ने सीएमओ के खिलाफ कोई कड़ा कदम क्यों नहीं उठाया! पार्टी के नेता इस मामले में सीएमओ के खिलाफ चुप्पी साधे हुए थे, लेकिन नेहा ने सीएमओ के विरोध में आवाज उठाई तो उन्हें ही पार्टी से बाहर क्यों कर दिया। ऐसा क्या कारण था कि भाजपा ने नेता अपनी नेत्री के खिलाफ तो कार्यवाही करते हैं लेकिन सीएमओ के खिलाफ कुछ भी बोलने से कतरा रहे हैं। 
फिलहाल इस जंग का नतीजा कुछ भी निकले लेकिन सीएमओ के कारण भाजपा की किरकिरी होने के तो आरोप लगे ही, लोगों की निगाहों में लेनदेन का शक भी  भाजपाईयों की चुप्पी व नेहा शर्मा के निष्कासन से गहराता हुआ दिख रहा है।

सीएमओ की सपा से रही हैं नजदीकियां! 
अंदरखाने भाजपाई भी दबी जुबान से स्वीकारते हैं कि सीएमओ सपा सरकार में पसंदीदा अधिकारी माने जाते रहे हैं। पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव हों या उनके चाचा शिवपाल सिंह यादव, पार्टी में उनकी खासी पूछ रही है। 
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