ब्राह्मण विरोधी छवि से भाजपा को उबरना होगा!

ब्राह्मण विरोधी छवि से भाजपा को उबरना होगा! 

Sanjay Saxena 

बिजनौर भाजपा नगर अध्यक्ष के रिश्वत प्रकरण में अखिल भारतवर्षीय ब्राह्मण महासभा ने नेहा शर्मा को नगर अध्यक्ष पद से मुक्त करने को ब्राह्मण विरोधी नीति बताया है। संगठन ने इसे एक तरफा कार्यवाही ठहराते हुए कड़ी निंदा की तथा उच्च पदाधिकारीयों से निष्पक्ष जांच की मांग की है। 
गौरतलब है कि अखिल भारतवर्षीय ब्राह्मण महासभा के इंडस्ट्रियल एरिया स्थित कार्यालय पर बैठक में नेहा शर्मा प्रकरण पर गहन विचार विमर्श किया गया। इस अवसर पर नेहा शर्मा को ब्राहमण सभा महिला मोर्चा को जिला अध्यक्ष बना दिया गया। वक्ताओं ने साफ कहा कि शीर्ष भाजपा पदाधिकारी इस गंभीर मामले में हस्तक्षेप करें।
अंदरूनी सूत्र बताते हैं, आज हालात यह है कि भाजपा ने ब्राह्मणों को अपना बंधुआ मान लिया है। इसलिए कोई  चुनाव लड़ने के लिए टिकट, संगठन में पद या सरकार में जगह देना और उसे पचा पाना आसान नहीं रहा। ब्राह्मणों की यह यह उपेक्षा भाजपा को भारी पड़ सकती है। अन्य राजनैतिक दलों से इतर अगर भाजपा में भी जगह नहीं मिलेगी तो फिर मोह भंग होगा ही। भाजपा के नेता कभी पिछड़ों, तो कभी दलितों की राजनीति के नाम पर ब्राह्मणों का तिरस्कार कर रहे हैं।
यह नाराजगी निचले स्तर पर ही नहीं मानी जानी चाहिए, क्योंकि यह भाजपा में शीर्ष पदों पर बैठे नेताओं में भी रही है। पिछले विधानसभा चुनाव में भाजपा उत्तर प्रदेश के निवर्तमान अध्यक्ष  लक्ष्मीकांत वाजपेयी से  एक वेबसाइट ने  इंटरव्यू में पूछा था कि ब्राह्मणों और दूसरी सवर्ण जातियों को भाजपा ने कम टिकट क्यों दिए हैं। उन्होंने जवाब दिया था कि यह बात भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष को बतानी चाहिए। इसके पीछे उनकी क्या रणनीति रही!
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